अनुराग कश्यप (image source: The Hindu)

फैंटम फिल्म्स बंद हो चुकी है। विकास बहल की असलियत दुनिया के सामने आ चुकी है। फैंटम के मेम्बर रहे विक्रमादित्य मोटवाने, विकास बहल के डायरेक्शन में बनी फिल्म क्वीन की एक्ट्रेस कंगना ने भी अपनी आपबीती बता दी है।इन सबके बीच मनमर्जियां के डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने भी एक लैटर के जरिए कन्फेस किया है कि आखिर वे अब तक खामोश क्यों थे।

पढ़िए अनुराग ने क्या लिखा है- 

फैंटम में मैंने अपनी ओर से हर मुमकिन कोशिश की। वे कोशिशें मेरे पार्टनर्स के द्वारा मुहैया करवाई गई जानकारियों पर आधारित थीं। मैं उन पर निर्भर था। उनके आधार पर मैं कानूनी और वित्तीय फैसले लेता रहा। मेरे साझेदार उन कानूनी और वित्‍तीय मसलों का ख्‍याल रखते रहे, तभी मैं खुद उस काम पर फोकस करता रहा, जिसमें मेरी मास्‍टरी थी। किसी भी मामले में उसकी और उसकी टीम से मिले फैक्‍ट ही हम सब के लिए फायनल वर्ड हुआ करते थे।

उस दौरान जो कुछ मुझे बताया गया, मुझे जो कानूनी नसीहतें मिलीं, उसके तहत हमारे पास बहुत लिमिटेड ऑप्‍शंस थे। अब, जब उस घटना के बाद उसे एनालाइज करता हूं तो पाता हूं कि कैसे मुझे गलत कानूनी नसीहतें मिलीं। मुझे अंधेरे में रखा गया। तब मुझे बताया गया कि हम कानूनी तौर पर बहुत खास कुछ नहीं कर सकते। तो मैंने मजबूत मोरल स्‍टैंड लिया। साथ ही हमने उस पर कार्रवाई करनी भी शुरू की। उसे पहले सस्‍पेंड किया। ऐसे मामलों में जहां बाकी कंपनियां कवर अप करने की कोशिश करती हैं। मैंने पब्लि‍कली विकास का नाम लिया। एक अखबार को इस बारे में बताया भी। यह सब करने वाला मैं ही था। मैंने इस मामले में कड़ा स्‍टैंड लिया। कुछ भी पर्दे के पीछे नहीं रखा।

अनुराग कश्यप (image source: Bhaskar.com)

विक्टिम को मुझ पर पूरा भरोसा था। हालांकि उस दौरान उसे पता था कि मेरे भी हाथ बंधे हुए हैं। वह इसलिए कि कानूनी फैसलों के लिए तो मैं अपने पार्टनर्स पर डिपेंडेंट था। विक्‍ट‍िम को यह भी पता था कि मुझे फैक्‍ट्स के नाम पर अंधेरे में रखा जा रहा है। विकास उस वक्‍त भी सुप्रीम पोजीशन में तो थे ही। लिहाजा उसका मुझ पर से यकीन डगमगा रहा था। तभी उसने उन कागजातों पर दस्‍तख्‍त नहीं किए, जिनमें शर्तें विकास के फेवर में थीं। विक्टिम का उस दौरान उसके बॉयफ्रेंड ने भी पूरा साथ दिया। जिस तरह से कंपनी में विकास के साथ चीजें हैंडल हो रही थीं, उससे उन दोनों का हम सभी पर से विश्‍वास पूरी तरह उठ गया। भरोसे की चौड़ी होती दरार के चलते हम विकास पर कोई एक्‍शन नहीं ले रहे थे। सब यही समझने लगे कि हम विकास को प्रोटेक्‍ट कर रहे हैं।

तब दरअसल जो लीगल एडवाइस भी हमें मिले, उनसे हमें यही पता चलता रहा कि हम तो असहाय हैं। उसकी दो वजहें थीं। एक तो यह कि हम एक ऐसे व्यक्ति से डील कर रहे हैं, जो कंपनी का प्रोमोटर है। वह कंपनी चलाता है। दूसरी यह कि हमारे कॉन्‍ट्रैक्‍ट में कोई प्रोविजन नहीं है कि हम मिसकंडक्‍ट के आधार पर उसे सैक कर सकें।

ये सारे इनफॉरमेशन एक जर्नलिस्‍ट के पास तब थे। वे सब मैंने और विक्टिम दोनों ने उस जर्नलिस्‍ट को मुहैया कराए। हालांकि मैंने मामले की पुष्टि करने में वक्‍त लिया। क्योंकि मुझे जर्नलिस्‍ट पर भरोसा करने में वक्‍त चाहिए था।

हालांकि तब विक्टिम ने कुछ न बोलने का फैसला लिया। उनके उस फैसले का सम्‍मान किया जाना स्‍वाभाविक था। हम अब जाकर इसलिए बोल रहे हैं कि विक्टिम ने हमें इसकी इजाजत दी। तो एक साल पुराने मामले पर अब जाकर बोलने की बात की वजह यह है। एक ओर तो मैं कानूनी तौर पर लाचार था। दूसरा यह कि मुझे विक्टिम के फैसले का भी सम्‍मान करना था।

अनुराग कश्यप
अनुराग कश्यप (image source: thenewsminute.com)

मेरे लिए दुख की बात यह थी कि विक्टिम ने मुझे बहुत बाद में आकर अपनी आपबीती बताई। वह शायद इसलिए कि मैं अपने डिप्रेशन से जूझ रहा था। उसने अपने गमों से खुद जूझते हुए मुझे मेरे डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद की। बदकिस्‍मती से उसके लिए मैं ज्‍यादा कुछ नहीं कर पाया। मगर यह कहना बहाना भर होगा मेरे लिए। फिर भी इस मामले में, मैं अब जो कुछ कर रहा हूं, उससे मेरी नीयत सबको समझ आ रही होगी।

बहरहाल, जो सवाल हम पर उठता है, वह यह कि हमने कंपनी कॉन्‍ट्रैक्‍ट में किसी भी हैसियत के इंसान को मिसकंडक्‍ट के मामले में सैक करने का प्रावधान क्‍यों नहीं रखा। मैं खुद यह सवाल भी नहीं कर सकता। वह इसलिए कि मैं इडियट था। आंखें मूंद कर उन पेपर्स पर मैंने साइन कर दिया था। इस पूरे मामले में मैंने एक सीख ली कि कंपनी के प्रोमोटर होने के नाते आप को कंपनी नियम के बारे में पता होना चाहिए।

अब मैं कंपनी नियमों के बारे में बहुत कुछ जान चुका हूं। अमूमन पचास फीसदी से ज्‍यादा क्रिएटिव पीपल इनके बारे में नहीं जानते। वे आंखें मूंद पर कंपनी कॉन्‍ट्रैक्‍ट साइन कर लेते हैं। क्रिएटिव लोगों की इसी लापरवाही का फायदा मिडिल मैन बिरादरी उठाती है। अब ज‍बकि मैं बहुत कुछ जान चुका हूं, मैं हर चीज पर क्‍वेश्‍चन करता हूं।

यह इंडस्‍ट्री सेक्‍शुअल हैरेसमेंट जैसे मामलों को हैंडल करने के मामले में पूरी तरह लाचार है। कॉपीराइट और सेंसरशिप का मामला तो है ही। इन सब चीजों के सामने आने पर हम पंगू से हो जाते हैं। वह इसलिए कि इनके कानूनी समाधान को लेकर हम सब में जागरूकता नहीं हैं। खुद सेंसर बोर्ड से नौ सालों की कानूनी जंग लड़ने के बाद मैं समझ पाया कि समस्‍या सेंसर बोर्ड नहीं है, ब‍ल्‍कि सेंसर के नियमों की हमारी कम समझ है। हम अक्‍सर एंटरटेनमेंट लॉयर्स के सुझावों से गाइड होते हैं, जो दोनों पक्षों को रिप्रजेंट कर रहा होता है।

अलबत्ता, यह सब रियलाइज करने के बाद भी मेरा गिल्‍ट मेरे साथ रहेगा। मैं आगे कभी किसी को मेरा फायदा नहीं उठाने दूंगा। मैं सच में इस वाकये के लिए दिल से माफी मांगता हूं। साथ ही यह सुनिश्‍चि‍त करता हूं कि आगे से कभी मेरे वर्क प्‍लेस पर इस तरह की चीजें रिपीट कतई नहीं होंगी।

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