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कहानी कुछ इस तरह से 

फिल्म में है भारत, पाकिस्तान, और समुद्र के नीचे की कोलाहल l  द गाजी अटैक’ की शुरुआत भारत और पाकिस्‍तान के राजनीतिक हालात के साथ शुरू होती है। जो बताती है की कैसे राजनीती सेना के कामकाज में दखल देती है l खैर, कहानी में एक गरम दिमाग कमांडर है राणा विजय सिंह (केके मेनन)। उसे एक गुप्‍त काम सौंपा जाता है। संभावना है कि पानी के अंदर पड़ोसी मुल्‍क हमला कर सकता है। इस आशंका की पड़ताल करनी है।

केके, राणा और अतुल की chemistery

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राणा विजय सिंह (केके मेनन) का मिजाज गरम होता है जिसे ठंडा रखने के लिए लेफ्टि‍नेंट कमांडर अर्जुन वर्मा (राणा डग्‍गुबती) को भेजा जाता है और निर्देश दिए जाते है की बहरत सिर्फ देफेंद करे अटैक नहीं जिस वजह से दोनों कमांडर के बीच गर्माहट पनपने लगती है और जिसे फिल्म में सँभालते हुए नज़र आते है एग्‍जीक्‍यूटिव अफसर देवराज (अतुल कुलकर्णी), फर्स्‍ट हाफ में तीनों अफसरों के बूते खूब जमती है।

मरने में नहीं, मारने में विश्‍वास रखता है ये कमांडर 

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फिल्म का ट्रेलर अगर आपने देखा हो तो उसमे आपको के के मेनन ये कहते हुए नज़र आते है की “अगर दुश्मन सामने आ जाये तो क्या तब भी आपके आर्डर का इंतज़ार करू” दूसरी तरफ अर्जुन नियम और कानून के हिसाब से चलता है। जबकि देवराज न्‍यूट्रल है। वह किसी का पक्ष नहीं लेता। फर्स्‍ट हाफ में फिल्‍म अफसरों के उलझने और मिशन की रूपरेखा में अच्‍छी बीतती है।

सेकेंड हाफ के बाद आप इसे एक इंच भी नहीं छोडोगे देखना !

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ऐसी फिल्मो में शतरंज सोने पे सुहागा का काम करती है दो अफसर हैं, जो शतरंज खेलते हैं और इस बहाने दुश्‍मन की चाल को समझने और परास्‍त करने की सूझबूझ दिखाते हैं। फिल्म में बतौर दर्शक आप भी सफ़र करते है नारे लगाते है और फुल एनर्जी से भर जाते है l

भले ही आप राणा डग्‍गुबती को पसंद करते हो लेकिन यहा के असली स्टार है केके मेनन ….अगला पेज